आज फिर दिल को तेरी याद ने छुआ यूँ ही,
बरसों बाद तुझसे मुलाक़ात हुई… आँखें भर आयीं।
तन्हाइयों में जो अश्क़ थे, चुपके से बहते रहे,
तेरा नाम लबों पे आया… आँखें भर आयीं।
कितनी ही रातें तेरी याद में जागते गुज़रीं,
आज तुझे देखा… आँखें भर आयीं।
जुदाई के उस मोड़ पे वक़्त ठहर-सा गया था,
आज वही लम्हा फिर लौटा… आँखें भर आयीं।
कदम बढ़े भी तो दिल ने इजाज़त न दी कभी,
तेरी गली का ख़याल आया… आँखें भर आयीं।
न शिकवा रहा कोई, न कोई गिला बाकी,
बस तेरा ख़ामोश सा चेहरा… आँखें भर आयीं।
कुछ भी न कहा हमने, न तुमने कुछ जताया,
एक नज़र ही काफ़ी थी… आँखें भर आयीं।
आख़िर में जब मुड़ के देखा, तू दूर जा रही थी,
दिल ने चुपके से कहा “अलविदा”… आँखें भर आयीं।
----- विभव जोगळेकर
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