Tuesday, March 31, 2026

वो पहला प्यार

मेरे जिंदगी में उसका आना,
एक हसीन इत्तेफाक था,
उस इत्तेफाक में दिल दे बैठा,
ये दिल भी कितना नादान था...

रोज होता दिदार उसका,
रोज की मुलाकात थी, 
रोज वही राहे, वही सफर,
और घंटो चलती बातें थी ...

वो हँसती थी खुलकर जैसे,
बादल बरसते सावन में,
मैं चुप रहता, उसे ताकता,
खोया सा अपने आप में ...  

ना बोल पाया बात मन की,
ना उसके एहसास जान सका,
बस दोस्ती निभाई मैंने,
उसके आगे ना बढ़ सका...

एक मोड आया जिंदगी में ,
राहे हमारी अलग हुई,
कुछ कहना चाहती थी वो शायद,
पर फिर मुस्कुराकर रह गयी ... 

कुछ कहानीया पुरी ना होती,
बस यादों में रह जाती हैं ,
पहले प्यार की वो हलकी खुशबू,
उम्र भर साथ निभाती हैं ...

----विभव जोगळेकर

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