उलझी उलझी सी है, जिंदगी अब मेरी ||
जब अकेला था मैं, बडा नादान था,
मुस्कुराहट से भरे, थे लम्हे सारे,
जबसें देखा तुम्हे, दिवाना हुवा,
मुस्कुराहट की वजह, अब तुम बन गये...
क्या बताउ तुम्हे, किस तरहा से ये,
उलझी उलझी सी है, जिंदगी अब मेरी ||१||
हर पल अब तुम्हे, सोचता रहता हु,
हर बात अब तुमसे, कहना चाहता हु,
उलझन है ये, अब तुमसे कैसे कहू,
मेरे धडकन की वजह, अब तुम बन गये...
क्या बताउ तुम्हे, किस तरहा से ये,
उलझी उलझी सी है, जिंदगी अब मेरी ||२||
छोटी छोटी बातोमे, खुश रहता था मैं
अपने मस्ती में जिंदगी, जी रहा था मैं,
उलझन है ये, तुमसे कैसे कहू,
मेरे खुशी की वजह, अब तुम बन गये....
क्या बताउ तुम्हे, किस तरहा से ये,
उलझी उलझी सी है, जिंदगी अब मेरी ||३||
------ विभव जोगळेकर
No comments:
Post a Comment