मनोगत
Thursday, April 2, 2026
प्रार्थना
Tuesday, March 31, 2026
वो पहला प्यार
Friday, March 27, 2026
कवितेच्या विश्वामधुनी...
Tuesday, March 24, 2026
आई
Saturday, March 21, 2026
चंद्र आणि कविता...
Tuesday, March 17, 2026
आँखें भर आयीं - Her Version
आज फिर तेरी आहट ने दिल को छुआ यूँ ही,
बरसों बाद तुझसे मुलाक़ात हुई… आँखें भर आयीं।
तुझसे दूर होकर भी तुझमें ही रही हर पल,
तेरा नाम दिल ने जो दोहराया… आँखें भर आयीं।
कितनी रातें तेरी याद में चुपचाप रोई हूँ,
आज तुझे यूँ सामने पाया… आँखें भर आयीं।
तू समझा होगा मैं भूल गयी हूँ सब कुछ,
पर तेरी एक झलक ने बताया… आँखें भर आयीं।
जुदाई मैंने भी हर रोज़ जी है ख़ामोशी से,
आज वही दर्द फिर मुस्कुराया… आँखें भर आयीं।
न शिकवा किया तुझसे, न कोई सवाल रखा,
बस दिल ने तेरा नाम सजाया… आँखें भर आयीं।
तू कुछ न बोला, मैं भी खामोश ही रही,
मगर हर लफ़्ज़ दिल ने सुनाया… आँखें भर आयीं।
जब तू मुड़ के चला गया, मैं भी वहीं ठहर गयी,
अपने ही दिल को समझाया… आँखें भर आयीं।
------ विभव जोगळेकर
आँखें भर आयीं - His Version
आज फिर दिल को तेरी याद ने छुआ यूँ ही,
बरसों बाद तुझसे मुलाक़ात हुई… आँखें भर आयीं।
तन्हाइयों में जो अश्क़ थे, चुपके से बहते रहे,
तेरा नाम लबों पे आया… आँखें भर आयीं।
कितनी ही रातें तेरी याद में जागते गुज़रीं,
आज तुझे देखा… आँखें भर आयीं।
जुदाई के उस मोड़ पे वक़्त ठहर-सा गया था,
आज वही लम्हा फिर लौटा… आँखें भर आयीं।
कदम बढ़े भी तो दिल ने इजाज़त न दी कभी,
तेरी गली का ख़याल आया… आँखें भर आयीं।
न शिकवा रहा कोई, न कोई गिला बाकी,
बस तेरा ख़ामोश सा चेहरा… आँखें भर आयीं।
कुछ भी न कहा हमने, न तुमने कुछ जताया,
एक नज़र ही काफ़ी थी… आँखें भर आयीं।
आख़िर में जब मुड़ के देखा, तू दूर जा रही थी,
दिल ने चुपके से कहा “अलविदा”… आँखें भर आयीं।
----- विभव जोगळेकर
प्रार्थना
जन्मोजन्मीचे वाहून ओझे, थकलो आता "आई" गं, आवराया हा सारा पसारा, मार्ग आता तू दावी गं... संचित बहू कर्माचे हे, नित्य भर त्यात पडते ...
-
का जाऊ पंढरीला, विठूरायाच्या दर्शना, विठू सदा माझ्या संगे, का तुम्हास दिसेना? विठू माझा, शेतामंदी, राबतोया दिसभर, शेताच ओझं माझ्या, माऊलीच्य...
-
ती लाजून पाठमोरी, चोरून अंग बसलेली, संकेत मिलनाचा, सांगे केशातली अबोली... एक याम रजनीचा, उलटून असा गेलेला, प्रत्येक सरत्या क्षणाला, श्वास...
-
"शेकू शिंदे" , ह्या माणसाची माझी ओळख पहिल्यांदा झाली २०१९ मध्ये, जेंव्हा आम्ही गृह प्रवेश करून स्वतः च्या घरात रहायला आलो. वारकरी ...