Thursday, April 2, 2015

चार दिवारो के भीतर

चार दिवारो के भीतर खामोशी बातें करती है,
बडी सरलता से मुझे ये मुझसे मिलाती है ।१।

चार दिवारो के भीतर मै खुदको सुनता हुं,
तनहा नाही, पार हा, अकेला होता हुं ।२।

चार दिवारो के भीतर मै डरता हुं, रोता हुं ,
दुनिया से परे, मै, मै बनकर जीता हुं ।३।

चूभते है दिल को, उन अतीत के पन्नो को पढता हुं,
हर बार नयी सिख लेकर पन्नो को पलटता हुं  ।४।

चार दिवारो के भीतर तुम्हे महसूस करता हुं,
हर सास तेरे लिये, तेरे सहारे लेता हुं  ।५।

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