कुछ दोस्त बिछडे थे बचपन में मेरे,
कुछ बातें कही सुनी थी आंगन में मेरे,
जाने क्यूँ यें बाते दे रही जिंदगीभर का साथ,
बनके जंजीर थामा है जिंदगीभर मेरा हाथ..
कभी खिलौना ना मिला तो तुटा ये दिल,
कभी अपने चिल्लाये तो मुरझा ये फुल,
जब बनाया मजाक भरी महाफील में,
सर झुका रहा अपनेही खामोशी में,
जाने क्यूँ यें बाते दे रही जिंदगीभर का साथ,
बनके जंजीर थामा है जिंदगीभर मेरा हाथ...
असफलता पर जब खूब ताने सुने,
बोल पडे सब जो माने थे अपने,
कुछ नया कर सकू ये साहस ना रहा,
मन की बातें कहू कोई ऐसा ना रहा,
जाने क्यूँ यें बाते दे रही जिंदगीभर का साथ,
बनके जंजीर थामा है जिंदगीभर मेरा हाथ...
वो बचपन की यादें वो खामोश लम्हे,
रुह कापती जब पलटता हुं वो अतित के पन्हे,
गुजरा वो जमाना जब अंधेरा था प्यारा,
फिर भी डरता हुं देखने नये सपने,
जाने क्यूँ यें बाते दे रही जिंदगीभर का साथ,
बनके जंजीर थामा है जिंदगीभर मेरा हाथ...
----- विभव जोगळेकर
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