Thursday, April 18, 2013

ऐ इन्सान जाग जरा


ऐ इन्सान जाग जरा, आवाज दे,
हवस के दरिन्दोसे लडने में साथ दे । 

माना के चूप रहना तेरी दुर्बलता का प्रतिक नही,
पर उन दरिन्दो के नजरो में, तेरी हार से कम नही । 
दुर्बल महिलाओन्के अत्याचारी कायर है, शूर नही,
पर उनके साहस की वजह, अपनेही जीवन में तू मगरूर कही । 

आज नही तो कल ये दुर्घटना, तेरे घर भी हो सकती है,
हर रोज कही किसीके  बेटीकी इज्जत जहा लुटती है  । 
तू अकेला नही इस राह में, हर वो शक्स तेरे साथ है,
जिसे अपने परीवारसे प्यार और अपने जिम्मेदारी का एहसास है । 

ऐ इन्सान जाग जरा, आवाज दे,
हवस के दरिन्दोसे लडने में साथ दे… 

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