ऐ इन्सान जाग जरा, आवाज दे,
हवस के दरिन्दोसे लडने में साथ दे ।
माना के चूप रहना तेरी दुर्बलता का प्रतिक नही,
पर उन दरिन्दो के नजरो में, तेरी हार से कम नही ।
दुर्बल महिलाओन्के अत्याचारी कायर है, शूर नही,
पर उनके साहस की वजह, अपनेही जीवन में तू मगरूर कही ।
आज नही तो कल ये दुर्घटना, तेरे घर भी हो सकती है,
हर रोज कही किसीके बेटीकी इज्जत जहा लुटती है ।
तू अकेला नही इस राह में, हर वो शक्स तेरे साथ है,
जिसे अपने परीवारसे प्यार और अपने जिम्मेदारी का एहसास है ।
ऐ इन्सान जाग जरा, आवाज दे,
हवस के दरिन्दोसे लडने में साथ दे…